कोरोनावायरस पर निबंध | coronavirus nibandh in Hindi

कोरोनावायरस पर निबंध | coronavirus nibandh in Hindi

Coronavirus nibandh in Hindi :- आज हम कोरोनावायरस पर निबंध लिखने वाले हैं क्योंकि इस बार कोरोनावायरस पर निबंध परीक्षाओं में आने की सबसे ज्यादा संभावना है ऐसे में सभी छात्रों के लिए कोरोनावायरस का निबंध most important हैं और सभी छात्रों को याद कर लेना चाहिए 
कोरोनावायरस पर निबंध | coronavirus nibandh in Hindi
तो चलिए अब जान लेते हैं कोरोनावायरस का निबंध कैसे और लिखना है और क्या लिखना है।

कोरोना संक्रमण का प्रकोप

कोरोना का संक्रमण, जन-मन है आक्रांत । दिन-दिन बढ़ता जा रहा, नहीं हो रहा अंत ॥”

(1) प्रस्तावना, 

(2) कोरोना का प्रारम्भ, 

(3) विश्व के देशों में फैलाव, 

(4) कोरोना वायरस के लक्षण, 

(5) कोरोना वायरस का प्रसार 

(6) कोरोना वायरस से

बचाव के उपाय, 

(7) उपचार 

(8) उपसंहार 

प्रस्तावना –

बीमारियों के अलग-अलग रूप रहे हैं। कुछ बीमारियाँ क्षेत्र विशेष में फैलती हैं, कुछ एक देश तक सीमित रहती हैं तथा कुछ विश्व के अनेक देशों में फैल जाती हैं। संसार के अनेक देशों तक फैलने वाली बीमारी ही विश्वव्यापी महामारी कहलाती है। कोरोना वायरस का संक्रमण विश्वव्यापी महामारी का रूप धारण कर चुका है।

कोरोना वायरस का प्रारम्भ-

कोरोना वायरस का प्रारम्भ चीन वुहान नामक शहर से हुआ। दिसम्बर 2019 में वुहान नगर के बहुत से लोगों को बिना किसी कारण के निमोनिया होने लगा। ये लोग अधिकांशतः मछलियों या पशुओं के व्यापार से जुड़े थे। बाद में इसे नियंत्रित करने का आग्रह चीनी प्रीमियर ली केकियांग ने किया, किन्तु यह संक्रमण निरन्तर फैलता रहा और चीन से बाहर पहुँच गया। कोरोना वायरस के फैलाव की संभावना चमगादड़ से भी की गई है।

विश्व के अनेक देशों में फैलाव-

कोरोना वायरस चीन से जाने वालों या चीन में
व्यापार हेतु बाहर के देशों से आने वालों के कारण विश्व के अन्य देशों में फैलने लगा। फरवरी,
मार्च 2020 तक इसकी चपेट में हजारों लोग आ चुके थे। थाईलैण्ड, दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान, हांगकांग, अमेरिका, सिंगापुर, वियतनाम, भारत, ईरान इराक, इटली, दुबई, कुवैत आदि 160 देशों में कोविड-19 नाम के वायरस के संक्रमण के पुष्ट मामले सामने आए। इसकी भयंकरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (W. H O) ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। यह वायरस तेजी से फैलता जा रहा है।

कोरोना वायरस के लक्षण-

कोरोना वायरस का सम्बन्ध वायरस के ऐसे परिवार से है जिसके संक्रमण से रोगी को खाँसी, बुखार, सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। मुख्य लक्षण खाँसी-जुकाम, बुखार तथा सांस लेने में तकलीफ हैं। नाक बहना, गले में खराश आदि भी इसके लक्षणों में शामिल हैं। कुछ रोगियों में संक्रमण तो था किन्तु खाँसी, बुखार, सांस लेने में कठिनाई नहीं थी। इससे स्पष्ट है कि बिना लक्षणों के भी यह संक्रमण हो सकता है।

कोरोना वायरस का प्रसार-

कोरोना वायरस मुख्य रूप से हवा के माध्यम से फैलता है। संक्रमित की खांसी, छींक आदि की बूँदों, थूक आदि से भी फैल सकता है। इसके प्रभाव की दूरी छः फीट (दो गज) है। हैंडल या रेलिंग के माध्यम से भी यह वायरस फैल सकता है। ऐसा भी पाया गया है कि कुछ संक्रमित लोगों ने वायरस को दूसरों तक नहीं पहुँचाया जबकि दूसरे संक्रमित लोगों ने संक्रमण को फैलाया। बुजुर्गों, मधुमेह, अस्थमा, हृदय की बीमारी के रोगियों में इस वायरस का अधिक खतरा है।

कोरोना वायरस से बचाव के उपाय-

अधिकारिक बचाव की सलाह में अग्रलिखित
बातें प्रमुख हैं(i) हाथ धोना- कम से कम 20 सेकण्ड तक साबुन से हाथ धोएँ। शौच जाने के बाद, भोजन से पहले, नाक साफ करने के बाद अवश्य हाथ धोने चाहिए। ऐसे स्थानों पर जहाँ साबुन उपलब्ध न हो तो सैनिटाइजर का उपयोग करें।
(ii) श्वसन स्वच्छता-संक्रमित होने के संदेह वाले लोगों को सर्जिकल मास्क पहनना चाहिए तथा चिकित्सक से मिलकर उनके अनुसार उपचार कराना चाहिए। कोरोना वायरस से बचने के लिए श्वसन स्वच्छता हेतु मास्क का प्रयोग करना चाहिए। मास्क को चेहरे तथा नाक पर सावधानी से लगाना चाहिए। खाँसने या छींकने के बाद नाक-मुँह को रूमाल या टिश्यू पेपर से साफ करना चाहिए।
(iii) सामाजिक दूरी रखना- कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए आवश्यक
है कि हम अन्य व्यक्तियों के सम्पर्क में कम-से-कम आएँ। जिनसे मिलें उनसे कम-से-कम
छः फुट की दूरी बनाए रखें। (iv) संगरोध (क्वारंटाइन) – कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए संगरोध आवश्यक है। अन्दर या बाहर जाने का प्रतिबन्ध लगाकर एकान्त स्थान तक सीमित होने से संक्रमण का प्रसार नहीं होगा।
(v) रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि-कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होना आवश्यक है। इसके लिए नियमित प्राणायाम, व्यायाम करने के साथ ही पौष्टिक भोजन लेना आवश्यक है।

उपचार-

कोरोना वायरस के उपचार को विश्व स्तर पर वैज्ञानिकों ने कार्य करना प्रारम्भ किया। इस प्रयास में भारत सफल रहा और उसने ‘कोवैक्सीन’ नामक टीके की खोज
की। अमेरिका ने ‘कोविशील्ड’ टीके का प्रारम्भ किया। इनके टीकाकरण का कार्य जोरों पर है। टीकों के सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं। रूस भी ‘स्तूपनिक’ टीके के लिए प्रयत्नशील है। गम्भीर रोगियों के उपचार के लिए रेमडेसीवर इंजेक्शन तथा प्लाज्मा थैरेपी को भी अपनाया गया, किन्तु अब प्लाज्माथेरेपी पर रोक लगा दी गई है। चिकित्सा वैज्ञानिक अभी भी अन्य उपचारों की खोज में लगे हैं। उक्त टीकों से नियन्त्रण होने की पूरी-पूरी सम्भावना है। चिकित्सकों के परामर्श का पालन करना चाहिए। आयुर्वेद तथा प्राकृतिक चिकित्सा में इसके लिए काढ़े तथा योगासन आदि को उपयोगी माना जा रहा है। इसके परिणाम भी सकारात्मक आ रहे हैं। रोगी की ऑक्सीजन तथा नब्ज की नियमित जाँच करनी चाहिए। इसके उपचार में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का सर्वाधिक महत्त्व है। रोगी को पौष्टिक भोजन देना जरूरी है।

घातक प्रभाव-

कोरोना वायरस के कारण असंख्य व्यक्तियों का निधन हो रहा है। जो ठीक हो रहे हैं उनमें भी भयंकर कमजोरी, निर्बलता, हीनता का भाव लम्बे समय रहता है। कुछ को तो इसका प्रभाव महीनों तक परेशान करता है।
इस रोग में रोगी की प्रबल इच्छाशक्ति होना जरूरी है। इससे रोग भी नियन्त्रित होता है तथा रोग के बाद स्वास्थ्य भी जल्दी ठीक हो जाता है। रोगी को सकारात्मक भाव की आवश्यकता होती है। संगरोध (क्वारंटाइन) के समय रोगी का हताश होना ठीक नहीं है।

उपसंहार-

कोरोना वायरस संक्रमण से सारा विश्व आतंकित है। इससे मुक्ति पाने के प्रयासों में शासन, प्रशासन, अनेक संगठन तथा चिकित्सक लगे हैं। हमें अपने स्तर पर पूरा-पूरा सहयोग करना चाहिए। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए अफवाहों, दुष्प्रचारों का प्रतिरोध करना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, प्रदेश सरकारें इसके समाधान के लिए निरन्तर कार्य कर रही हैं। इनके प्रयासों के परिणाम भी अनुकूल आ रहे हैं। हमें मजबूत होकर इसका सामना करने की आवश्यकता है। हमारी सफलता निश्चित है

“कोरोना को मारेंगे, नहीं तनिक भी हारेंगे। हमसे डर मर जाएगा, दुनिया देश उबारेंगे।”

Note- अगर आपको यह कोरोनावायरस का निबंध पसंद आया हो अपने दोस्तों के साथ भी इसे अवश्य शेयर करें और हमें कमेंट करके अवश्य बताएं आपको यह पोस्ट कैसी लगी।

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